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1.चींटी और कबूतर 
kabutar ki kahani



 एक दिन की बात है एक चींटी पेड़ पर चढ़ रही थी ,चढ़ते-चढ़ते उसका पैर अच्चानक फिसल गया और वो तालाब में जा गिरी और चींटी अपनी पूरी कोसिस कर रही थी। ताकि वो पानी से बहार आ जाए लेकिन उसकी सारि कोसिस नाकाम हो रहीं  थीं।  

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ये  सब एक कबूतर  पेड़ के ऊपर से देख़  रहा था ,उसे दया आ गयी और उसने चींटी की मदद करने को सोचा उसने पेड़ से एक पत्ता तालाब में गिरा दिया ,चींटी उस पर बैठ गयी और उसकी ज़ान बच गयी ,उसने कबूतर का ध्यानवाद दिया ,कबूतर भी वहा चला गया। 

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कुछ सप्ताह बाद एक बहेलियाँ (पक्षी पकड़ने वाला ) जंगल में आया उसने अपनी ज़ाल बिछा दी और कुछ दाना डाल दिया। जब चींटी वह से गुज़र रहीं थी तब उसने देखा की वहीं कबूतर है ,जिसने उसकी जान बचाई थी।बहेलियाँ के ज़ाल में फ़सने वाला था ,उसने बहेलियाँ के पैर में इतनी जोर से काटा  की बहेलियाँ की चीख़ निकल गयी ,

आप ये hindi kahani national hindi पे पढ रहें है। 

कबूतर ने बहेलियाँ की आवाज़ सुनी और सारा मामला समझ गया 

इस कहानी से हमने क्या सीखा (moral of the story )
कर भला तो हो भला 


2.  होशियार बकरी 
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एक गांव के किसान के पास एक बकरी थीं ,जिसके तीन बच्चे थे बकरी हमेसा चिंता में रहती थीं , क्युकी  गांव के पास ही एक जंगल था ,और जंगल में बहोत सारे जंगली जानवर भी रहते थे ,वो अपने बच्चों  को हमेसा  समझा या करती थी। 

की उस तरफ़ मत जाना ,एक दिन किसान जंगल से कुछ घास लाया और बकरी और उसके बच्चों को दिया ,बकरी के बच्चें को वो घास बहोत पसंद आया और उसने किसान को बात करते सुना था ,की वो ये घास उस जंगल से लाया है। 

वो उस घास के लिए जंगल में चली गयी ,अभी को जंगल के थोड़ा अंदर ही गयी थी के बकरी उसे ख़ोजने लगी ,वो जैसे ही अपने बच्चों के पास पहुँची लोमड़ियों ने उसे घेर लिया ,बकरी चिंतीत हो गयी ,उसने अपने दिमाग़ का इस्तेमाल किया और लोमड़ियों से कहाँ ,

बकरी:हमलोग शेर  राजा  के नास्ता है ,हमे खाने की गलती मत करना 
लोमड़ी:शेर राजा को बातयेगा कौन  की तुम्हे हमनें खाया ?
बकरी: वहाँ हाथी दिख रहा है ,न उसे शेर राजा ने हमलोगो पे नज़र रखने 
के लिये रखा है। 

लोमड़ियाँ  डर कर भाग जाती है। 

अभी बकरी थोड़ी आगे बढ़ी ही थी ,की अच्चानक शेर राजा आ धमके बकरी डर गई और बोली 

बकरी: शेर  राजा हमें मत खाये 
शेर : क्यों ?
बकरी: क्युकी शेरनी ने हमें आपको नास्ते में खुद देना चाहती है ,
शेर: मैं कैसे मानु अगर तम भाँग गयी तो !
बकरी : इसी लिए शेरनी ने कौवा (kauwa) को हमलोगो पे नज़र रखने को कहा हैं। 
शेर: अच्छा ठीक है ,बाद में भी मैं तुम्ही ही खाऊँगा शेरनी से झगड़ा कोण करेगा ,

और शेर वहाँ से चला जाता है ,और बकरी बिना रुके सीधे किसान के घर पहुँच जाती है ,

इस कहानी से हमने क़्या सीखा (moral of story is)

बुद्धि से बड़ा बल कोई नहीं है ,

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