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essay on ganesh chaturthi festival in hindi language

भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है यहाँ हर धर्म के लोग रहते  है ,भारत में  हर एक त्यौहार बड़े  ही उल्लाश और ख़ुशी के साथ मनाया जाता है यहाँ पर दीपावाली,होली,ईद,बकरीद बहोत ही प्रसिद्ध त्योहार है और बड़े  ही उल्लाश के साथ मनाया गता है।


Ganesh chaurthi images


गणेश चतुर्थी भी उनमे से एक है जो भारत में बहोत धूम-धाम से मनाया जाता है ,और महाराष्ट्र में तो इस त्योहार को बहोत ही अच्छे तरिके से आयोजित किया जाता है ये त्यौहार करीब 11 दिनों तक चलता इसमें गणेश जी पकी प्रतिमा लगायी जाती है ,लोग दूर-दूर से महाराष्ट्र गणेश चतुर्थी देखने जाते है ,

लोगो की बहोत आस्था इस त्यौहार से जुड़ी होती है ,लोगो पुरे साल इस दिन का इंतज़ार करते है ,खासकर बच्चे ,क्युकी इस तरह-तरह की मिठाया बनती है ,बाजार में बहोत भीड़ होती है।  मेले लगते है बच्चे मेले में खुमने जाते है और गणेश जी की मूर्ति लाते है ,गणेश जी की  मूर्ति को को घर के मदिर में अस्थापित करते है ,और उनकी पूजा अर्चना करते है।

गणेश चतुर्थी पे लेख आप national hindi से लिख सकते है। 



गणेश चतुर्थी भारत में मनाये जाने वाले त्योहारो में से एक प्रमुख त्योहार है जो भारत के कोने-कोने में मनाया जाता है,इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन  गणेश भगवान की पूजा होती है। इस त्योहार को धूम-धाम से मुंबई में मनाया जाता है.

 लोग दूर-दूर से मुंबई की गणेश चतुर्थी देखने आते है ,इस दिन भगवन गणेश की बड़ी-बड़ी प्रतिमाये बनती है ,और पूजा कुल 9 दिनों तक चलती है ,इस दिन मेले लगते है ,तरह-तरह के पकवान बनते है ,बच्चे मेले देखने जाते है और मेले से भगवान गणेश की मूर्ति लाते है और घर के मंदिर में अस्थापित करते है,

 और 9 दिनों तक उनकी पूजा होती है और 9 दिनों के  बाद गणेश जी की प्रतिमा को किसी नदी या तालाब  विसर्जित कर दी जाती है।

गणेश चतुर्थी में स्कूलों में भी छुट्टी होती है ,और कई स्कूल कॉलेज इस दिन कुछ फंक्शन रखते  है जिसमे बच्चे भाग लेते है ,कुछ स्कूलों में भी गणेश जी  की प्रतिमा लगायी जाती है और 9 दिनों तक पूजा की जाती है और 9 दिनों के बाद गणेश जी  को विसर्जित कर दिया जाता है ,और फिर लोग बेसब्री से गणेश जी के आने का इंतज़ार करते है ,

क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी


शिव पुराण के अनुसार जब ये प्रश्न उठा की सबसे प्रथम पूजनीय कौन  होगा तब देवताओ ने भगवान् शिव के पास इस समस्या का समाधान मांगने गए तब शिव जी ने कहा जो भी पृथ्वी की चक्कर  सबसे पहले पूरी करेगा उसे  ही प्रथम पूजनीय माना  जाएगा ,सभी देवता अपने-अपने वाहन पे बैठ कर पृत्वी के चक्कर लगाने के लिए निकले गए ,


लेकिन गणेश जी के लिए यह मुश्किल था क्यों की उनका वाहन मूषक राज थे ,तो उन्होने अपने चतुरता  से अपने माता-पिता के चक्कर  की और कहा  लीजये हो गए ,शिव जी ने कहा तुम अति बुद्धिमान हो तुमने अपने माता-पिता के चक्कर लगाके 3नो  लोको की प्रक्रिमा पूरी कर्ली ,और तबसे कोई भी काम करने से पहले भगवान  गणेश की पूजा होता है। 

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