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4 story in hindi language with morals


bachho ki kahaniya
ईमानदारी का इनाम 
1. एक गाँव में एक पेंटर रहता था ,वो बहोत ईमानदार था और कभी किसी से बेमानी नहीं करता था। वो दिन रात मेहनत करता था ,फिर भी उसे 2 वक़्त की रोटी ही मिल पाती थी ,वो हमेसा सोचता की कभी उसे कोई बड़ा काम मिले और वो अच्छे से पैसे कमा सके ,

एक दिन उसके पेंट की अदाकारी के बारे में जमींदार साहब को पता चला जमींदार साहब ने उसे बुलाया और कहाँ तुम्हें मेरी नाव पेंट करनी है ,

पेंटर: जी ठीक है हो जाएगा 
ज़मीनदार: अच्छा ये तो बताओ कितना लोगो ,
पेंटर: साहब ऐसे तो नाव पेंट के 1500 होते है। आपको जो मन हो वो देदे,
ज़मीनदार: ठीक है चलो नाव देख लो 
पेंटर: चलिए 

पेंटर नाव देख लेता है ,और बोलता है जमींदार साहब मैं अभी पेंट लेके आता हूँ ,

पेंटर पेंट लेके आता है ,और पेंट करना सुरु कर देता है। जब वो पेंट करते-करते नाव के बिच में आता है तो देखता है ,की उसमे एक सुराख़  है ,वो उस को भर देता है और पेंट पूरा होने के बाद जमींदार को बुला कर ले आता है ,जमींदार उसके काम से बहोत खुश होता है ,

और बोलता है कल अपने 1500 ले लेना ,वो उस सुराख़ के विषय में जमींदार को नहीं बताता है और वो वहाँ से चला जाता है ,अगले दिन वो अपने परिवार को उस नाव से नदी की सैर करने भेज देता है आप a small story in hindi national hindi पे पढ़ रहे है 



वो घर पर आराम करता रहता है तभी उसका नौकर वहाँ आता है ,उसके परिवार को न देखर जमींदार से पूछता है बाकि लोग कहाँ है जमींदार बोलता है ,वो लोग नाव से नदी की सैर करने गए है ,

ये सुनकर नौकर चिंतित हो जाता है जमींदार साहब पूछते है ,क्या हुआ तुम चिंतित क्यों हो ,

नौकर : मालिक दरअसल उस नाव में सुराख़ था ,

ये सुनकर जमींदार भी चिंतित होता है लेकिन थोड़ी देर में उसका परिवार आ जाता है। जिसे देख वो थोड़ा सांत हो जाता है ,

अगले दिन पेंटर अपना पैसा लेता है जमींदार उसे पैसा देता ,पेंटर पैसा गिनता है। और बोलता है मालिक ये ज़्यादा है मेरे तो 1500 हुए लेकिन ये तो 6000 है। 

जमींदार: देखो भाई उस नाव में सुराख़ भी था ,जिसके बारे में तुमने मुझे नहीं बतया था और उसे भर भी दिया। 

पेंटर: मालिक सुराख़ भरने के भी 6000 नहीं होंगे। 
जमींदार: लेकिन मेरे परिवार की कीमत इससे कही ज़्यादा है ,जो तुम्हारी वजह से आज कुशल है। 
अगर  तुम वो सुराख़ नहीं भरते तो आज मेरा परिवार मेरे साथ नहीं होता। 

पेंटर खुश होंगे सरे रूपये रख लेता है और वहाँ से चला ज़ाता है ,

इस कहानी से हमने सीखा की हमें हमेशा ईमादारी से काम करना चाहिए 


2. कामचोर गधा 

एक छोटा सा गाँव था ,वहाँ एक व्यापरी रहता था ,उसके पास एक गधा था , उसने शहर जाके नमक की बेचने की सोची और उसने अपने गधे के पीठ पर नमक लाद दिया और शहर की तरफ चल दिया। तभी बिच में एक बड़ी नहीं मिली नदी ज्यादा गहरा नहीं था ,

इस लिए व्यापारी आराम ने नदी पर करने की कोसिस कर रहा था तभी अचानक गधे का पैर फिसल गया और वो नमक के साथ ही नदी में गिर गया ,गिरने के बाद जब वह उठा तो उसे नमक का वज़न कम लगा क्युकी पानी में गिरने के वजह से नमक बह गया था। 

अब गधे को सैतानी सूझी वो अगले दिन जान बुझ कर नदी में गिर गया ,वो हर रोज ऐसे  था ,अब व्यापारी को गुस्सा आने लगा क्युकी उसका बहुत नुकसान हो रहा था ,उसने एक तरकीब सोची वो गधे  सिखाना चाहता था  

अगले दिन उसने गधे की पीठ पर रुई दाल दी ,फिर से नदी पार करनी ही थी ,जैसे ही गधा नदी में उतरा वो जान बूझकर नदी में गिर गया ,लेकिन इस बार उसे सब उल्टा पर गया क्युकी रोई ने  पानी सोख लिया और वज़न घंटने की गजह और बढ़ गया ,

अब गधा कर भी क्या सकता था ,क्युकी उसे रुई लेके शहर तो जाना ही था ,

इस कहानी ने हमने सीखा की हमें कभी भी आलस नहीं करना चाहिए इसी लिए  ज़्यादा अलसी लोगो को कामचोर बोलते है। 


3.होसियार बन्दर 

एक जंगल के बीचो बिच बहुत बड़ा झील था उसमे एक  बहोत बड़ा मगरमछ  रहता था ,उसे एक दिन बहुत भूक लगी- पास कोई शिकार भी नहीं मिल रहा था ,तू उसने मछली खाने की सोचे जैसे ही उसने मछली पे हमला किया मछली बच गयी। 


अब उसे गुस्सा भी आ रहा था और भूक भी लगी थी ,वो अपनी से बाहर आकर जामुन के पेड़ के निचे बैठा हुआ था ,तभी उसे कोई खुश्बू आयी और वो इधर-उधर देखने लगा। तभी उसने एक बन्दर जामुन के पेड़ पे देखा और वो जामुन खा रहा था ,


उसने बन्दर से कहाँ बन्दर भाई क्या खा रहे हो बन्दर बोला जामुन 
मगरमछ बोला  मुझे भी खिलाओ बन्दर ने उसे जामुन दिया उसे जामून बहुत पसंद आया ,उसने बन्दर से कहा बन्दर भाई जामुन तो बहोत स्वादिस्ट है ,क्या तुम मुझे रोज जामुन खिलोगे बन्दर ने कहा क्यों नहीं ,

दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गए एक साथ खेलते कभी बन्दर पानी में खेलने जाता कभी मगरमछ ज़मीन पे आ जाता सब कुछ बहोत अच्छा चल रहा था ,एक दिन दोनों का खेलना ख़तम होने के बाद मगरमछ ने कहाँ की आज मुझे थोड़े जामुन दो मैं अपनी पत्नी को खिलाऊंगा बन्दर ने उसे जामुन दे दिया ,

वो जामुन लेके अपनी पत्नी के पास गया ,और बोला ये लो तम्हारे लिए ,उसकी पत्नी को भी जामुन बहुत पसंद आया ,और उसने कहाँ की किसने दिए ,मगरमछ ने कहाँ उस पेड़ पर मेरा एक मित्र रहता है बन्दर उसने ही मुझे दिया है ,

मगरमछ की पत्नी बोलती है जब ये जामुन इतना अच्छा है ,तो सोचो की इस जामुन को खाने वाले बन्दर का का दिल कितना स्वादिस्ट होगा ,मुझे उसका दिल खाना है ,मगरमछ ने कहाँ ये तुम क्या कह रही हो वो मेरा मित्र है। 

मैं उसके साथ ऐसा नहीं कर सकता हूँ ,मगरमछ की पत्नी ने कहाँ की अब घर आना तो उसका दिल लेके आना नहीं तो मत आना ,मगरमछ मायूस हो जाता है ,और बन्दर के पास जाता है ,और उसे अपनी पीठ पे बिठाकर अपनी पत्नी के पास ले जाता रहता है ,की बन्दर उसे पूछता ह मुझे कहाँ ले जा रहे हो और 


तुम आज कुछ मायूस भी लग रहे हो क्या बात है। मगरमछ कहता मित्र  मेरी पत्नी को तुम्हरा दिल खाना है ये सुनकर बन्दर के पसीने छूट जाते है। उसने अपनी बुद्धि का उपयोग  और बोला  मित्र मैंने तो अपना दिल जामुन के पेड़ पर ही छोड़ दिया है ,

मगरमछ बोला ऐसा कैसे हो सकता है ,बिना दिल के तुम ज़िंदा कैसे हो उसने कहाँ मुझे वरदान है ,तुम उस जामून  के पेड़ के पास चलो मैं अपना दिल लेके आता हूँ ,मगरमछ उसे वहाँ लेके जाता है ,बन्दर जल्दी से कूद कर पेड़ पे चढ़ जाता है ,


मगरमछ बोलता है चलो मित्र दिल ले लिया न तुमने मेरी पत्नी इंतज़ार कर रही होगी ,बन्दर ने कहाँ अरे मुर्ख कोई बिना दिल का ज़िंदा रह सकता है मैंने तुम मुर्ख बनाया कैसे मित्र हो तम ,ये सब सुनकर मगरमछ कोट गता है ,


इस तरह बन्दर ने अपनी बुद्धि का उपयोग करके अपनी जीवन बचाया  

4. जादुई टोकरी 

एक छोटे से गाँव में एक छोटे से घर में मानसी नाम की एक लड़की अपनी माँ के  रहती थी वो  बहोत से मेहनती थी लेकिन गरीब थी ,वो भगवान से रोज यही प्राथना  करती हे भगवान मुझे बहोत पैसा नहीं चाहिए बस इतना देदो ताकि मैं अच्छे कपड़े और खाना खा सकू ,

दीपावली के दिन पूरा गाँव अच्छे से सजा हुआ था ,और मानसी का घर पुराना जैसा लग रहा था ,सबने नये कपड़े भी पहने थे लेकिन उसके पास नए कपड़े भी नहीं थे ,

वो रात को फिर रोते हुए भगवान से प्राथना की और सो गयी ,रात में उसे कोई आवाज़ सुनाई और उसकी नींद खुल गयी उसने देखा की उसके सामने कुछ चमक रहा ही ,

वो कुछ समझती उससे पहले वहाँ पारी प्रकट हो गयी ,और उसने मानसी से कहाँ की तुम खुश रहा करो मैं तुम्हे ऊपर से देखती हूँ बहोत दुःख होता है ,उसने कहाँ मुझे भगवान ने तुम्हारी मदद करने के लिए भेजा है ,

उस पारी ने उसे एक फल की   टोकरी दी और कहाँ ये एक जादुई टोकरी इसके फल कभी ख़तम नहीं होंगे ,और उसके बाद वो चली गयी ,सुबह उठके उसने अपनी माँ को सारी बात बताई और उसकी माँ ने फल का कारोबार सुरु कर दिया।

धीरे-धीरे उसकी सारी परेशानी दूर हो गयी और उसकी माँ ने उसी गांव में एक बड़ा घर भी ले लिया ,

उस टोकरी के बारे में एक चोर को पता चला उसने सोचा अगर वो ये टोकरी चुरा ले  मालामाल हो जाएगा ,उसने रात में उसके घर जाके वो टोकरी चुरा ली ,उस में रखे फल देख उसके मुँह में पानी आ गया ,और उसने एक फल उठाया और खाने की कोसिस की फल खाते ही वो बेहोश हो गया। 

और जब उसकी सखे खुली तो वो मानसी के घर में था ,मानसी ने कहाँ की तुम्हे अभी पुलिस के हवाले करती हूँ ,वो रोने लगा और माफ़ी मांगने लगा मानसी ने उसे माफ़ कर दिया और एक वादा लिया की दुबारा ऐसा काम नहीं करेगा ,


इस कहानी  हमने सीखा की किसी भी परिस्थि में हमें घबराना नहीं चाहिए और चोरी तो भूल के भी नहीं करनी चाहिए। 

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