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गरीब की किस्मत हिंदी कहानियाँ

Hindi Kahaniya: गरीब की किस्मत 



किसी राज्य में राजा विक्रम आदित्य का शासन था विक्रम आदित्य की पत्नी ने एक राज कुमार को जन्म दिया राज कुमार के जन्म से राजा विक्रम आदित्य बहुत खुश थे ,कुछ दिन बाद एक पंडित राजा विक्रम आदित्य से मिलने आया। 

और बोलते है महारज  जय हो ,महाराज राज कुमार किस्मत के धनि है ये राज्य को हमेशा तरक्की की ओर लेके जाएंगे लेकिन इनका विवाह एक गरीब लड़की से होगा 

महाराज बोलते है ,नहीं मेरे पुत्र का विवाह किसी गरीब लड़की के साथ नहीं होगा ,बल्कि एक राज कुमारी के साथ होगा पंडित जी बोलते है महाराज आप कुछ भी कर सकते है लेकिन किस्मत का लिखा नहीं बदल सकते महाराज बोलते है ,पंडित जी आप तो बहुत ज्ञानी है क्या आप बता सकते है की वो लड़की इस वक़्त कहा होगी। 

राजा के पूछने पर पंडित जी अपनी झोली से एक किताब निकलते है। और कुछ मन्त्र पढ़ते हुए किताब को राजा के सामने रख देते है इसके बाद किताब में एक छोटी सी बच्ची की तस्वीर दिखने लगती है।  पंडित जी बोलते है ,ये वही लड़की है जिसकी षादी राज कुमार के साथ होगी और इस वक़्त ये आपके राज्ये से कुछ दुरी पर बने एक छोटे गांव में है। 

पंडित की बात राजा विक्रम आदित्य पर इतना प्रभाव डालती है की वो राज कुमार से किसी भी आम इंसान से मिलना बंद करवा देते है और ज़्यादा तर उन्हें महल में ही रखते है। इसी तरह साल दर साल बिट जाते है और राज कुमार एक युवा लड़के बन जाते है। 

लेकिन अभी-भी राजा उन्हें घर से बाहर नहीं निकले देते है , राज कुमार महाराज से बोलते है पिता जी आप हमें महल से बाहर क्यों नहीं निकले देते बचपन से इस महल के चार दीवारों ,में रहते हुए हमारा दम घुटने लगा है। 

महाराज बोलते है ,हम जो भी कर रहे है आपकी भलाई के लिए कर रहे है अपने पिता की बात सुनकर राज कुमार चुप-चाप अपने कमरे में चले जाते है। और अगले दिन से महाराज के 50 वे जन्म दिन की तैयारी सुरु हो जाती है जसके लिए राज्य और राज्य के बाहर से कुछ लोगो को महल में बुलाया जाता है।

  उन्ही लोगो के बिच अनुराधा भी काम करने के लिए महल में आती है। राज कुमार कहते है कुछ दिनों में हमारे पिता जी का 50 वा जन्म दिन है जिसकी तैयारियों के लिए आप सभी को यहाँ बुलया गया है। आप सभी मन लगा के काम कीजिए जिसके लिए आप सभी को 10 सोने की मोहरे और दावत में परिवार को लेके आने का न्योता मिलेगा। 

इसके बाद सब अपने-अपने काम में मगन हो जाते है कुछ देर बाद जैसे ही राज कुमार काम की जांच करने के लिय रसोई घर में पहुंचते है तो वहां उनकी मुलाक़ात अनुराधा से होती है।  राज कुमार बोलते है वाह खाने की तो बहुत अछि खुसबू आ रही है। क्या हम थोड़ा चख सकते है आप हाथो में तो जादू है। आपका नाम क्या है और कहाँ से आयी है 

अनुराधा बोलती है ,जी मैं राज्य के पास वाले गांव से आयी हूँ। राज कुमार अनुराधा की सुन्दरता और सादगी  बहुत प्रभावित हो जाते है ,वो दोनों हर रोज मिलने लगते है। इसी तरह कुछ दिन बीत जाते है और राजा विक्रम आदित्य का जन्म दिन आ जाता है। 

जन्म दिन के जसन में राजा विक्रम आदित्य राज कुमार और अनुराधा को साथ बैठ कर बात करता देख लेते है राजा विक्रम आदित्य कहते है। एक आम लड़की वो भी हमारे पुत्र के साथ हमें जल्द इसे यहां से बाहर निकालना होगा। 

राजा अनुराधा को महल से निकलने ही वाले होते है की तभी वहां वही पंडित आ जाते है जिन्होंने राज कुमार के जन्म के वक़्त भविस्य वाणी की थी और बोलते है महाराज को जन्म दिन बहुत मुबारक हो,महाराज बोते है  अच्छा हुआ पंडित जी आप आ गए   . 

उस लड़की को देख कर बताये क्या ये वही गरीब लड़की है जिसके बारे आपने भविष्या वाणी की थी पंडित जी बोलते है ,जी महाराज यही है राज कुमार की होने वाली रानी। पंडित की बात सुनकर राजा गुस्से से लाल  हो जाते है। और राज कुमार और अनुराधा को अलग करने की तरकीब सोचने लगते है। 

अगले दिन राजा अनुराधा को अपने साथ राज्य की सिमा पर बहने वाली नदी के पास ले जाते है और उसे नदी में धक्का दे देते है और कहते है अब न ये लड़की बचेगी न ही मेरे पुत्र की शादी किसी गरीब लड़के से होगी, राजा के  जाते ही नदी के पास ही रहने वाला मछुआरा अपनी नाव लेकर नदी में जाता है और अनुराधा को बचा लेता है। 

जिसके कुछ दिनों तक अनुराधा बेहोश रहती है। कुछ दिनों बाद जब उसे होश आता है तो मछुआरा उसे देख कर बहुत खुश होता है। और कहता है अरे बेटी तुम्हे होश आज्ञा पिछले कुछ दिनों से तुम्हे बेहोश देख कर तो मुझे डर लगने लगा था। की कही तुम्हरी मृत्यु न हो जाए ,

अनुराधा बोलती है लेकिन मुझे तो महाराज ने ,फिर मैं यहां कैसे आयी अनुराधा के पूछने पर मछुआरा उसे सारि बात बता  है जिसे सुनकर अनुराधा की आँखो में आसु आ जाते है। इसके बाद वो अच्छी तरह स्वस्थ होने तक मछुआरा के साथ ही रहती है ,

और स्वस्थ होने के बाद दुबारा महल पहुंच जाती है अनुराधा को जीवित देख राजा हक्का-बक्का रह जाता है। और बोलता है ये लड़की अभी भी जीवित है फिर हम इसे अपने पुत्र से दूर रखने के लिए और क्या करे बहुत सोचने के बाद राजा विक्रम आदित्य एक और दुस्ट योजना बनता है। 

अनुराधा तथा राजकुमार को लेकर दुबारा नदी के पास जाता है वहाँ जाकर वो राज कुमार के हाथ से अंगूठी निकाल कर उसे नदी में फैक देता है और बोलता है अगर आप दोनों का प्रेम इतना अच्छा है और तुम मेरे पुत्र से विवाह करना चाहती हो तो जाओ और राज कुमार की अंगूठी लेकर आओ अगर अंगूठी ले आयी तो हम खुद ये विवाह कर आएंगे। 

तथा जब तक अंगूठी न मिले तब तक महल में किसी को अपनी सकल भी मत दिखाना ये बोलकर राजा विक्रम आदित्य राज कुमार को अपने साथ लेकर वहां से चले जाते है। अनुराधा सोचती है इतने बड़े नदी में अंगूठी मिलना तो मुश्किल है और इस बार महारज ऐसा काम कर गए है की इस बार मुझे और राज कुमार को अलग करने के लिए उन्हें कोई मेहनत नहीं करनी होगी। 

उसके बात अंगूठी मिलने की उम्मीद में अनुराधा उसी मछुआरे के साथ रहने लगती है समय बीता रहता है साथ ही राज कुमार तथा अनुराधा अपनी सभी उमीदे हरने लगते है  एक दिन मछुआरा नदी में से बहुत सारा मछली पकड़ कर लता है और बाजार में बेचने जा रहा होता है। तभी अनुराधा कहती है बाबा क्या मैं इनमे से एक मछली रख लू। 

आज मछली खाने का बहुत मन कर रहा है मछुआरा बोलता है ज़रूर बेटी ज़रूर सब तुम्हारा ही तो है जो अच्छी लगे रख रख लो, अनुरधा मछलियों के ढ़ेर में से एक मछली निकलती है जैसे ही वो उसे साफ करने के लिए कटती है तो उसे मछली के पेट में कुछ चमकता हुआ नज़र आता है जैसे ही वो चमकती चीज को हाथ में लेती है। 

तो ख़ुशी से नाचने लगती है और कहती है राज कुमार की अंगूठी मुझे मिल गयी ख़ुशी में अनुराधा जल्दी महल पहुँचती है और सीधा राजा विक्रम आदित्य के पास जाकर उन्हें वो अंगूठी दिखती है अनुराधा के पास वो अंगूठी देखकर राजा एक दम हक्का-बक्का रह जाता है और हार मानते हुए अनुराधा तथा राज कुमार की शादी करा देता है जिसके बाद वो लोग हमेसा बहुत खुश रहने लगते है 

moral of story:हमें किस्मत के आगे ज़्यादा लड़ने की वजह उसके बहाव के साथ ख़ुशी-ख़ुशी चलते रहना चाहिए 

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