Skip to main content

jalpari aur nagin ki hindi kahaniya

jalpari aur nagin ki hindi kahaniya 




सीतापुर में बड़े से समुन्दर  किनारे एक जंगल था। वहाँ सब नाग और नागिन रहते थे।  उसी जंगल में सलोनी नाम की एक नागिन रहती थी जो बहुत ही खूबसूरत और दिल की बहुत अच्छी थी। नागिन सलोनी की सिर्फ दो सहेलिया थी नागिन रुद्रलि और नागिन ऋषिका। 


ऋषिका और रुद्रलि सलोनी को बिलकुल पसंद नहीं करते थे उससे बहुत ही ज़्यादा इर्षा करते थे दोनों नागिन सलोनी के सामने अच्छे रहते लेकिन पीठ पीछे बहुत ही ज़्यादा बुराई करते थे , ये बात नागिन सलोनी को पता थी लेकिन फिर भी वो अपनी सहेलियों से कुछ नहीं कहती थी। 

एक दिन समुन्दर में बहुत बड़ा तूफान आया हवाएं बहुत ही ज़्यादा तेज थी रात भर जोरो से बर्रिश हुई अगले दिन सुबह नागिन सलोनी और उसकी सहेलिया समुन्दर के पास गयी और देखा की एक जल पारी समुन्दर से बाहर आकर बेहोश पारी हुई है। 

नागिन सलोनी कहती है।  ये तो एक जल पारी है सायद कल रात की तूफान में समंदर से बाहर आगयी चलो इसकी मदद करते है ,नागिन सलोनी की सहेलियाँ कहती है हमें बहुत काम है तुम ही इसकी मदद करदो  अपनी सहेलियों की बात सुनकर नागिन सलोनी बहुत उदास  जाती है। 


और खुद ही अपने नागिन रूप पे आके जल पारी की मदद करती है अपने हाथ से जल परी को समुन्दर में डालती है। जैसे ही नागिन ने जलपरी को समुन्दर में डाला वो ठीक हो गयी और ठीक होकर ऊपर आयी नागिन सलोनी का जलपरी ने ध्यावाद किया। 

दोनों बहुत ही अचे दोस्त बन गए नहीं सलोनी हर रोज जल पारी से मिलने के लिए समंदर के पास आती दोनों एक दूसरे से खूब सारि बाते करते देखते ही देखते दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए एक दिन नागिन सलोनी और जलपरी बैठ कर बाते कर रहे थे। 

नागिन सलोनी कहती है मुझे न एक बार समंदर के अंदर जाके देखना है की समंदर के जीव कैसे रहते है पानी के अंदर जल पारी बोलती है है मुझे भी पृथ्वी घूमना बहुत पसंद है। क्यों न तुम मुझे पृथ्वी घुमा लाओ और मैं तुम्हे समंदर की सैर करवाती हूँ। 

नागिन सलोनी ने अपनी शक्तियो से जलपरी को पूरा इंसानो की तरह बना दिया सारे जंगल की सैर करवाई और अपने दोस्तों से भी मिलवाया  देख कर नागिन सलोनी के दोस्त उससे और भी ज़्यादा ईर्षा करने लगे फिर जलपरी नागिन सलोनी को समंदर की गहराइयों में ले गयी। 

सरे समंदर की सैर करवाई और अपनी माँ से भी मिल वाया समंदर की सैर कर के नागिन सलोनी बहुत ही ज़्यादा खुश हो गयी नागिन सलोनी और जल पारी की बढ़ती हुई दोस्ती को देख नागिन रुद्रलि और नागिन ऋषिका बहुत ही ज़्यादा ईर्षा करने लगे। 

अगले दिन जलपरी नदी किनारे नागिन सलोनी का इंतज़ार कर रही थी तभी वहाँ नागिन रुद्रलि और नागिन ऋषिका पहुंच जाती है। जलपरी बोलती है तुम्हरे साथ नागिन सलोनी क्यों नहीं आयी कहाँ है वो नागिन ऋषिका कहती है तुम्हे पता है। 

नागिन सलोनी तुम्हे बिलकुल पसंद नहीं करती वो तुम्हारे पीठ पीछे तुम्हारी बहुत बुराइया करती है। कल तो उसने कहा था की तुम्हारे पास कभी नहीं आएगी जलपरी बोलती है नहीं! नहीं! सलोनी तो बहुत अच्छी दोस्त है वो मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहेगी। 

वो तो मुझे बहुत पसंत करती है। नागिन ऋषिका कहती है तो क्या हमलोग तुमसे झूट बोल रहे है और नागिन रुद्रलि कहती है देख लेना आज के बाद वो नहीं आएगी जलपरी बोलती है मुझे नागिन सलोनी पर बहुत विश्वास है। मैं यहाँ से जा रही हूँ 

फिर नागिन रुद्रलि और नागिन रियशिका दोनों नागिन सलोनी के पास गयी और कहा सलोनी तुम्हे पता हम अभी-अभी जल परी से मिलकर आ रहे है वो तुम्हरे बारे में बहुत बुरा भला कह रही थी कह रही थी की वो तुम्हे बिलकुल पसंत नहीं करती है। तुम उसके पास  जाना 

नागिन सलोनी कहती है तुम दोनों मेरी दोस्त हो और जल पारी भी मेरी बहुत अच्छी  दोस्त है मैं तुम्हे भी जानती हूँ और जलपरी  को भी बहुत अच्छे से जानती हूँ वो मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहेगी मुझे उसपर पूरा विश्वास है। 

और रही बात सकल नहीं देखने की तो वो मेरी दोस्त है अगर वो मेरे से नाराज़ है तो मैं उसे मना लुंगी तुम दोनों चिंता मत करना रानी रुद्रलि कहती है तम कहा जा रही हो देख लेना वो नहीं आएगी नागिन सलोनी कहती है कहा न तुम दोनों चिंता मत करो वहाँ से चली जाती है। 

नागिन सलोनी समंदर के किनारे जाकर इधर-उधर जलपरी को ढूंढने लगी तभी जलपरी समंदर के ऊपर आयी दोनों एक दूसरे को देख कर बहुत ही ज़्यादा खुश हो गए दोनों दोस्तों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और कहा मैं जानती थी 





तुम मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहोगी मुझे तुम पर पूरा विश्वास था इसी लिए मैं ऊपर आयी तुम्हे देखने के लिए नागिन सलोनी कहती है मुझे भी तुमपर पूरा भरोसा था इसी लिए मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। जलपरी वो दोनों बहुत बुरी है मैं उन दोनों को नहीं छोड़ूंगी। 

सबक तो सिखाना पड़ेगा !

नागिन सलोनी कहती है वो दोनों तो अभी नादान है आगे चल कर खुद समझ जाएंगे सच्ची दोस्ती क्या होती होती है नागिन ऋषिका और नागिन रुद्रलि जलपरी और नागिन सलोनी की बाते सुन रही होती है नागिन सलोनी की अच्छाई को देख कर दोनों बहुत ही ज़्यादा सर्मिन्दा हो जाती है। 

दोनों ने नागिन सलोनी और जलपरी से माफ़ी मांगी जलपरी और नागिन सलोनी ने दोनों दोस्तों को माफ़ कर दिया फिर सब दोस्त मिलकर राजी ख़ुशी रहने लगे  

  
moral of story:अगर दोस्ती में विस्वास हो तो कोई नहीं तोर सकता 

Comments

Popular posts from this blog

लूडो वाली बहुँ की हिंदी कहानियां

लूडो वाली बहुँ  Hindi kahaniya  लूडो वाली बहुँ : विदाई के वक़्त मंजू की मम्मी मंजू से कहती है देख रे मंजू दूसरे शहर के लोग है इन्हे तेरी मोबाइल के एडिक्शन नहीं पता और रिस्ता हो गया वहाँ कोई नाटक मत करना नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मंजू अपने ससुराल पहुंच जाती हैं।  जहाँ उसे उसकी सास कहती है ,अब सास को आराम देकर  तुहि मेरे बेटे और इस घर का ख्याल  रखेगी अभी तो कोई काम है नहीं इसी लिए कल से सारि ज़िमेदारी सम्भाल लेना बेटा ,मंजू अपने कमरे में आराम करती है और अगली सुबह ससुराल में सारा काम संभाल लेती है  लेकिन काम करते हुए गुस्से में बर-बाराती भी रहती है (सारा घर सम्भाल लेना बहु लेकर आई है या नौकरानी एक तो घर न जाने कौन से कोने में है जहाँ इंटरनेट का एक सिग्नल तक नहीं आता और बात तो ऐसे करती है जैसे न जने कौन से ख़जाने की मालकिन हो )  सास: पहले ही दिन क्या हो गया बहु जो घर में कैलिसि फैला रही हो  बहुँ: अभी तक कुछ किया नहीं मम्मी जी बस अपनी किस्मत पर रो रही हूँ। मायके में पूरा समय wifi से लूडो खेलती थी यहाँ तो नोटिफिकेशन देखने लायक़ इंटरनेट नहीं चलता। लूडो क्या  घंटा

3 भाइयो की hindi kahani

एक व्यक्ति के 3 बेटे थे ,तीनो में बहुत अंतर था ,3 नो अलग-अलग स्वभाव के थे बड़ा बेटा  बहोत मुर्ख और बतमीज़ था ,मझला थोड़ा समझदार था ,और सबसे छोटा बेटा  अति बुद्धिमान और संस्कारी था ,वो हमेसा अपने से बरो का आदर सत्कार करता है ,उस व्यक्ति को अपने सबसे बड़े बेटे की बहोत चिंता रहती थी ,किसी काम की वजह से उन्हें दूसरे गांव जाना था ,और वो गांव काफी दूर था ,इसी लिया उन्होंने अपने साथ खाना और कपड़ा ले लिया और यात्रा के लिए निकल परे, यात्रा के कुल 3 दिन होगये थे लेकिन वो अपनी मंजिल तक  नहीं पहुँच पाए थे ,वो लोग रास्ता भटक गए और खो गए उन्हें रास्ता याद नहीं आ रहा था ,उनके खाने का सामान खत्म हो गया था वो 2 दिनों से भूखे थे ,वो सभी एक पेड़ के निचे बैठ गये ,थोड़ी देर बाद उन्होंने एक घोड़े की आवाज़ सुनी  और देखा की वो एक व्यापारी था ये भी पढ़े  और उसके पास  बहोत साड़ा खाने का सामान एक गांव से दूसरे गांव वो बेचने जा रहा है था उस व्यक्ति ने अपने सबसे बड़े बेटे से बोला  की जाओ और उस व्यापारी से कुछ खाने को मांगो बड़ा बेटा  वहा जाता  और व्यापारी से बोलता है , बड़ा बेटा : अरे ओ व्यापारी तू इतना माल ले जा

4 story in hindi language with morals

ईमानदारी का इनाम  1.  एक गाँव में एक पेंटर रहता था ,वो बहोत ईमानदार था और कभी किसी से बेमानी नहीं करता था। वो दिन रात मेहनत करता था ,फिर भी उसे 2 वक़्त की रोटी ही मिल पाती थी ,वो हमेसा सोचता की कभी उसे कोई बड़ा काम मिले और वो अच्छे से पैसे कमा सके , एक दिन उसके पेंट की अदाकारी के बारे में जमींदार साहब को पता चला जमींदार साहब ने उसे बुलाया और कहाँ तुम्हें मेरी नाव पेंट करनी है , पेंटर: जी ठीक है हो जाएगा  ज़मीनदार: अच्छा ये तो बताओ कितना लोगो , पेंटर: साहब ऐसे तो नाव पेंट के 1500 होते है। आपको जो मन हो वो देदे, ज़मीनदार: ठीक है चलो नाव देख लो  पेंटर: चलिए  पेंटर नाव देख लेता है ,और बोलता है जमींदार साहब मैं अभी पेंट लेके आता हूँ , पेंटर पेंट लेके आता है ,और पेंट करना सुरु कर देता है। जब वो पेंट करते-करते नाव के बिच में आता है तो देखता है ,की उसमे एक सुराख़  है ,वो उस को भर देता है और पेंट पूरा होने के बाद जमींदार को बुला कर ले आता है ,जमींदार उसके काम से बहोत खुश होता है , और बोलता है कल अपने 1500 ले लेना ,वो उस सुराख़ के विषय में जमींदार को नहीं बताता है और वो वहाँ से चला