Skip to main content

बुद्धिमान चायवाला ki free hindi kahani

बुद्धिमान चायवाला ki free hindi kahani

बुद्धिमान चायवाला ki free hindi kahani


all hindi kahainya:बाघपुर गांव में हरीश चायवाला अपनी चाय की छोटी सी डेरी चलता था एक तो चाय वैसे ही सस्ती होती है और कई बार उसके मुफ़्तखोर दोस्त भी आ जाते थे तो कभी कोई मज़बूर भूखा प्यासा इंसान आ जाता था तो वो उन्हें चाय पीला देता था। ऐसे में उसका अक्सर नुकसान  था इस बात से वो बहुत परेशान रहता था। 

एक चाय वाला अपनी पत्नी से पैसे देते हुए कहता है आज फिर यही पैसे मिले है ,इतनी मेहनत करने के बाद  कभी कमाई नहीं होती और जब कमाई होती है तो कुछ मुफ्त खोर दोस्त मिल जाते है और कभी-कभी तो कोई भूखा-प्यासा आ जाता है एक तो एक चाय पर एक रुपया कमाई  होती है और वो भी इनके वजह से बरा-बार हो जाती है ,आप ये purani hindi kahani national hindi पर पढ़ रहे है 

उसकी पत्नी बोलती है ,कोई बात नहीं जी भूखे प्यासे को चाय पीला देना तो अच्छी बात है ,हरीश बोलता है। हाँ लेकिन मुफ्त खोर दोस्त आते है वो 
हरीश की पत्नी बोलती है ,वो भी उनके माशीब का खाते है यही सोचकर खुश हो जाया कीजिए  आइये बैठये खाना लगाती हूँ ,चाय की डेरी ऐसी जगह है जहा लोग इकठा होते है और अपनी दुःख दर्द की बाते करते है। 

चायवाला हरीश सबको चाय पिलाते  सबका दुःख दर्द सुनता रहता था एक दिन चाय वाले के दुकान से सामने  बात कर रहे थे पहला आदमी बोलता है क्या बात है भोला कुछ परेशान से लग रहे हो ,भोला बोलता है हाँ भाई क्या बताऊ बीवी की तबियत ख़राब है और डॉक्टर  पास जाने के लिए पैसे नहीं है ,दूसरा आदमी बोलता है भाई मेरा पेमेंट नहीं आया है नहीं तो मैं ही देदेता हरीश भाई से पूछ के देखो ,आप ये purani hindi kahani national hindi पर पढ़ रहे है 

भोला बोलता है , हरीश भाई 500 रूपये दे दोगे परसो पगार मिलते ही  दे दूंगा  मेरी बीवी की तबियत ख़राब है मैं परसो पक्का दे दूंगा ,हरीश उसे पैसे दे देता है और तीसरे दिन वो आदमी आकर हरीश को उसके 500 रूपये दे देता है। हरीश जैसे ही पैसे को अपने पॉकेट में रखने ही वाला था और आदमी आ गया ,

और बोलता है हरीश भाई संकर बता रहा था की आपने भोला को 500 रूपये देकर मदद की थी मेरी भी 300 देकर मदद कर दो कल साम को वापस कर दूंगा बड़ी परेशानी में हूँ हरीश उसे उसे 300 रूपये दे देता है है अगले दिन सच-मुच् रामु आता है और हरीश के 300 रूपये वापस कर देता है ,हरीश रूपये लेकर पॉकेट में रख लेता  है। 

हरीश चाय वाला उसे चाय देता है ,तभी एक आदमी रोता हुआ आता है और बोलता है हरीश भाई  भोला ने भेजा है प्लीज मुझे 1000 रूपये दे दो बहुत  ज़रूरत है नहीं तो मैं मर जाऊंगा प्लीज हरीश भाई प्लीज ,हरीश बोलता है अरे मैंने तो भोला की यु ही मदद करदी दी थी मेरे पास उतने पैसे नहीं होते है। आप ये purani hindi kahani national hindi पर पढ़ रहे है 

वो आदमी बोलता है नहीं हरीश भाई ऐसा मत कहो  नहीं तो मैं मर जाऊंगा मैं परसो वापस कर दूंगा प्लीज हरीश भाई, हरीश बोलता है ,ठीक है ठीक है रो मत ये लो , और हरीश भाई उसे 1000 रूपये दे देते है उन्हें इस बात का डर भी लगता है की  ऐस न हो की इतनी बड़ी रकम लेकर वो चम्पत हो जाय लेकिन परसो वो सच मुच् वापस आता है और 100 के नोट देता है। 

हरीश भाई नोट गिनते है तो देखते है की वो 1200 है ,हरीश भाई बोलते है ,भाई ये तो 1200 है आप तो 1000 ही ले गये थे ये लीजिये 200 वापस ,वो आदमी बोलता है ,नहीं हरीश भाई ये मेरी तरफ से आपको वक़्त पे आपने मेरी मदद की ,हरीश बोलता है , नहीं ! नहीं ! मैं ये नहीं ले सकता , वो आदमी बोलता है लेलो हरीश भाई , फिर ज़रूरत पारी तो आप ही काम आएंगे फिर ले लेंगे। आप ये purani hindi kahani national hindi पर पढ़ रहे है 

हरीश भाई बोलते है ,ठीक है आपके ये रूपये माकी रखता हूँ जब ज़रूरत परे तब ले लेना, उसी दिन हरीश चायवाला अपने घर पर जलेबी लेकर पहुंचा ,बीवी जलेबी देखते ही खुश हो गयी और बोलती है मेरी पसंद की जलेबी 4 महीने से इंतज़ार कर रही थी लगता है आज कमाई हुई है हरीश बोलता है कमाई ही नहीं एक्स्ट्रा 200 आगये ,हरीश पत्नी बोलती है ,200 रूपये वो कैसे, हरीश भाई बोलते है मेरे एक ग्राहक को 1000 रूपये की ज़रूरत थी। 

मैंने दे दिए उसका काम हो गया तो ख़ुशी मैं उसने 1000 के साथ-साथ 200 एक्स्ट्रा दे दिए,उस दिन पहली बार हरीश चायवाले ने अपनी बीवी को इतना खुश देखा था ,रात भर हरीश चाय वाले को नींद नहीं आयी वो सोचता रहा मेरी चाय की डेरी रोज ही ऐसे दुखी लोग आके अपने पैसे का रोना रोते है। 

अगर मैं इसी तरह लोगो की मदद करता राहु और लोग मुझे एक्स्ट्रा पैसे देते रहे तो मेरे पास एक नई तरह का कमाई का जरिया सुरु हो जाएगा और तब से हरीश न की सिर्फ चाय पे ध्यान देता था बल्कि लोगो की बातो पर भी ध्यान देता था जिसे भी ज़रूरत होती वो उसे पैसे कर्ज के तौर पर दे देता धीरे-धीरे लोगो को पता चला ,आप ये purani hindi kahani national hindi पर पढ़ रहे है 

की हरीश चायवाला लोगो  पैसे  है और लौटने वक़्त रकम ज़्यादा ले लेता है , पहले तो हरीश चायवाला एक्स्ट्रा पैसे जेब में रखता था लेकिन धीरे-धीरे उसकी जेब दोपहर होने तक भर जाती तो उसने उसके लिए एक तिजोरी खरीद ली फिर तो तिजोरी भी कम परने लगी, चाय वाले की एक छोटी सी डेरी एक बड़ी सी दूकान में बदल गयी। 

हरीश चायवाले का चाय का धंधा तो साइड में ही रह गया और पैसो के लेन-देन का धंधा जोरो से चल पड़ा हरीश चायवाले के पास चाय पीने वाले कम और मदद मांगने वाले ज़ादा आने लगे हरीश चायवाले के मन में न सिर्फ लोगो  मदद करना था बल्कि उसका स्वभाव भी बहुत अच्छा था,

धीरे-धीरे उसने अपने गांव में ही नहीं बल्कि आस-पास के गांव में अपनी इज़्ज़त इतनी बना ली की जब गांव में मुखिया का चुनाव हुआ तो सबने उसी का नाम लिया , उसने बहुत मना किया लेकिन कोई नहीं माना और वो सारे जिनकी जाने अन जाने में उसने मदद की थी उसे भरी मतों से जीता कर अपना मुखिया बना लिया ,आप ये purani hindi kahani national hindi पर पढ़ रहे है 

अपने पति को मुखिया देख चायवाले की बीवी बहुत खुश हुई और बोली ,आपने कौन सा जादू कर दिया लोगो पर चायवाले से सीधा मुखिया,हरीश बोलता है क्या बताऊ ,सुमन मैं सिर्फ एक बात जनता हूँ इंसान चाहे कितना छोटा काम क्यों न करता हो ज़िन्दगी उसे एक मौका ज़रूर देती है ,अगर वो अपनी बुद्धिमानी से उस मौके का फ़ायदा उठा जाता है तो वो दुनिया की बड़ी से बड़ी जंग जीत जाता है।   

Comments

Popular posts from this blog

3 भाइयो की hindi kahani

एक व्यक्ति के 3 बेटे थे ,तीनो में बहुत अंतर था ,3 नो अलग-अलग स्वभाव के थे बड़ा बेटा  बहोत मुर्ख और बतमीज़ था ,मझला थोड़ा समझदार था ,और सबसे छोटा बेटा  अति बुद्धिमान और संस्कारी था ,वो हमेसा अपने से बरो का आदर सत्कार करता है ,उस व्यक्ति को अपने सबसे बड़े बेटे की बहोत चिंता रहती थी ,किसी काम की वजह से उन्हें दूसरे गांव जाना था ,और वो गांव काफी दूर था ,इसी लिया उन्होंने अपने साथ खाना और कपड़ा ले लिया और यात्रा के लिए निकल परे, यात्रा के कुल 3 दिन होगये थे लेकिन वो अपनी मंजिल तक  नहीं पहुँच पाए थे ,वो लोग रास्ता भटक गए और खो गए उन्हें रास्ता याद नहीं आ रहा था ,उनके खाने का सामान खत्म हो गया था वो 2 दिनों से भूखे थे ,वो सभी एक पेड़ के निचे बैठ गये ,थोड़ी देर बाद उन्होंने एक घोड़े की आवाज़ सुनी  और देखा की वो एक व्यापारी था ये भी पढ़े  और उसके पास  बहोत साड़ा खाने का सामान एक गांव से दूसरे गांव वो बेचने जा रहा है था उस व्यक्ति ने अपने सबसे बड़े बेटे से बोला  की जाओ और उस व्यापारी से कुछ खाने को मांगो बड़ा बेटा  वहा जाता  और व्यापारी से बोलता है , बड़ा बेटा : अरे ओ व्यापारी तू इतना माल ले जा

लूडो वाली बहुँ की हिंदी कहानियां

लूडो वाली बहुँ  Hindi kahaniya  लूडो वाली बहुँ : विदाई के वक़्त मंजू की मम्मी मंजू से कहती है देख रे मंजू दूसरे शहर के लोग है इन्हे तेरी मोबाइल के एडिक्शन नहीं पता और रिस्ता हो गया वहाँ कोई नाटक मत करना नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मंजू अपने ससुराल पहुंच जाती हैं।  जहाँ उसे उसकी सास कहती है ,अब सास को आराम देकर  तुहि मेरे बेटे और इस घर का ख्याल  रखेगी अभी तो कोई काम है नहीं इसी लिए कल से सारि ज़िमेदारी सम्भाल लेना बेटा ,मंजू अपने कमरे में आराम करती है और अगली सुबह ससुराल में सारा काम संभाल लेती है  लेकिन काम करते हुए गुस्से में बर-बाराती भी रहती है (सारा घर सम्भाल लेना बहु लेकर आई है या नौकरानी एक तो घर न जाने कौन से कोने में है जहाँ इंटरनेट का एक सिग्नल तक नहीं आता और बात तो ऐसे करती है जैसे न जने कौन से ख़जाने की मालकिन हो )  सास: पहले ही दिन क्या हो गया बहु जो घर में कैलिसि फैला रही हो  बहुँ: अभी तक कुछ किया नहीं मम्मी जी बस अपनी किस्मत पर रो रही हूँ। मायके में पूरा समय wifi से लूडो खेलती थी यहाँ तो नोटिफिकेशन देखने लायक़ इंटरनेट नहीं चलता। लूडो क्या  घंटा

4 story in hindi language with morals

ईमानदारी का इनाम  1.  एक गाँव में एक पेंटर रहता था ,वो बहोत ईमानदार था और कभी किसी से बेमानी नहीं करता था। वो दिन रात मेहनत करता था ,फिर भी उसे 2 वक़्त की रोटी ही मिल पाती थी ,वो हमेसा सोचता की कभी उसे कोई बड़ा काम मिले और वो अच्छे से पैसे कमा सके , एक दिन उसके पेंट की अदाकारी के बारे में जमींदार साहब को पता चला जमींदार साहब ने उसे बुलाया और कहाँ तुम्हें मेरी नाव पेंट करनी है , पेंटर: जी ठीक है हो जाएगा  ज़मीनदार: अच्छा ये तो बताओ कितना लोगो , पेंटर: साहब ऐसे तो नाव पेंट के 1500 होते है। आपको जो मन हो वो देदे, ज़मीनदार: ठीक है चलो नाव देख लो  पेंटर: चलिए  पेंटर नाव देख लेता है ,और बोलता है जमींदार साहब मैं अभी पेंट लेके आता हूँ , पेंटर पेंट लेके आता है ,और पेंट करना सुरु कर देता है। जब वो पेंट करते-करते नाव के बिच में आता है तो देखता है ,की उसमे एक सुराख़  है ,वो उस को भर देता है और पेंट पूरा होने के बाद जमींदार को बुला कर ले आता है ,जमींदार उसके काम से बहोत खुश होता है , और बोलता है कल अपने 1500 ले लेना ,वो उस सुराख़ के विषय में जमींदार को नहीं बताता है और वो वहाँ से चला