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Naurkri wali bahu ki hindi kahaniya

Naurkri wali bahu ki hindi kahaniya


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मीरपुर गांव में तेजस अपनी पत्नी के साथ रहता था दोनों ही नौकरी करते थे। एक दिन तेजस गांव में अपनी माँ को फ़ोन करता है। 
तेजस:प्रणाम माँ 
माँ: जीते रहो बीटा 
तेजस: माँ तुम दादी बनने वाली हो 
माँ: अरे वाह ठीक हैं बीटा मैं कल ही आती हूँ 

जब माँ जी घर पहुंची तो बहुँ ने बहुत अच्छे से स्वागत किया ,माँ जी लिगए चाय , तेजस बोलता है गाओ माँ के लिए गर्म-गर्म पकोड़े ले आओ निरु रसोई में जाती है और माँ के लिए पकोड़े ले आती है,

माँ: बहुँ जादू  से ले आयी क्या अभी तो रसोई में गयी ही थी। 
बहुँ: माँ जी शीला पकोड़े तल रही है। मैं तो बस ले आयी 
माँ: हे भगवान मेरा धर्म भरस्ट कर दिया तुमने !  अब तो गंगा जल से सुधि करण करना होगा। 

दूसरे दिन माँ जी मैंने नास्ता बना दिया है अब मैं ऑफिस जा रही हूँ ,माँ जी बोलती है हे भगवान अभी तो घर का पूरा काम बाकि है। 

निरु: माँ जी शीला आती ही होगी वो झाड़ू पोछा सब कर लेगी। 

माँ: हमारे ज़माने में घर का काम हम खुद ही किया करते थे ,
निरु: माँ जी आप बहुत होसियार है लेकिन मुझसे नौकरी और घर दोनों नहीं समभाला जाता 

माँ: तो ज़रूरत क्या है घर के बाहर चाकरी करने की घर का काम खुद करने से घर में बरकत आती है समझी 

निरु: पर माँ जी!
माँ: पर-वर कुछ नहीं इस महीने की पगार मिले फिर ऑफिस बंद हाँ 

रात को निरु तेजस से कहती है सुनिए जी माँ जी बोल रही थी की मैं नौकरी छोर  दू  तेजस बोलता है ठीक ही तो है अभी तुम्हे आराम की ज़रूरत है निरु   बोलती है फिर भी आराम कहा शीला को छोड़ने को बोलती है ,

तेजस: तो अब 24 घंटे में इतना काम तो कर ही सकती हो 
निरु:  पर जॉब पसंद है मुझे घर पर मेरा मन नहीं लगेगा 

अगले दिन दोनों ऑफिस के लिए निकल रहे थे तब माँ जी बोलती है 

माँ: मेरी तो कोई कीमत ही नहीं है इस घर में 
निरु: माँ आज कल मेह्गाई बहुत बढ़ गया है दोनों मिलकर नौकरी करेंगे तभी ठीक रहेगा 
माँ: अच्छा तू कहना क्या चाहती है मेरा बेटा तुझे बिठा के खिला नहीं सकता है। तू ही इस घर का खर्च चला रही है 

निरु: नहीं नहीं माँ जी मेरा वो मतलब नहीं था 

माँ: मतलब खूब समझती हूँ मैं ये बाल मैंने धुप में सफ़ेद नहीं किये है ,हां 

अब ये रोज का काम हो गया था तेजस भी इस ज़िग-ज़िग से परेशान हो चूका था एक दिन उसने कहाँ निरु वैसे भी तुम्हे ऑफिस से लीव मिलने वाली है ,क्यों न अभी से ही छुट्टी लेलो 

निरु: पर
तेजस: पर क्या ! 

आखिर निरु ने रिजाइन कर दिया जब बच्चा हुआ तो सब लोग बहुत खुश हुए कुछ दिनों बाद तेजस फाइल देख रहा था 

निरु: क्या हुआ तेजस परेशान लग रहे हो 
तेजस: हाँ हमारी जितनी सेविंग्स थी वो सब हॉस्पिटल और फक्शन में ख़तम हो गया ,अभी वैसे मंडी चल रही है तो 

निरु: मुन्ना को हेपॅटिसिस का इंजेक्शन दिल वाना है। 
तेजस:निरु पोस्पोनेड नहीं कर सकते है क्या ?
निरु: नहीं जी बिकुल नहीं 
अब तेजस को समझ आ रहा था की उससे गलती हो गयी है पैसो के कमी का असर घर के माहौल पर पर रहा था 

अगले दिन तेजस की माँ कहती है बीटा मेरा चस्मा और दवाइया ले आना 
तेजस: जी 
निरु: मुन्ना के लिए दूध और डायपर भी ले आना और ये किराने के सामान  की लिस्ट है इसे भी लाना है। 

तेजस गुस्से में लिस्ट मरोर कर फेकता है और बोलता है ये ले आना वो ले आना पैसे क्या पेड़ पर उगते है 
निरु: अरे ये ज़रूरत का सामान ही है 
वो गुस्से में बिना कुछ कहे ऑफिस में चला जाता है 
निरु:अरे लंच तो ले ज़ाये 
निरु  दौर कर डिब्बा पकड़ाती है। 

एक दिन खाना खाने के बाद तेजस बोलता है निरु  मुन्ना कुछ बड़ा हो गया अब तुम वापस ज्वाइन कर कर लो न जॉब 
निरु: इस समय जॉब मिलना मुश्किल है और माँ जी को भी ये पसंद नहीं तभी माँ जी वहाँ आ जाती है और बोलती है मुझे माफ़ कर दो बहु मुझसे गलती हो गयी 

Moral of the story: समय के साथ परिवर्तन ज़रूरी है 

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