Skip to main content

पुरानी सास-Purani Sas ki hindi kahaniya

पुरानी सास-Purani Sas ki hindi kahaniya 
पुरानी सास-Purani Sas ki hindi kahaniya


hindi kahaniya: उर्मिला देवी एक पुरानी प्ररम्परा को मानने वाली एक महिला थी। अपने इस स्वाभाव के चलते वो घर के बाकि लोगो पर भी अपने मानेताओ का बंधन रखती थी एक दिन वो बोली।,आज सब ध्यान  सुनो आज सूर्य ग्रहण होने वाला है इसी लिए जब तक मैं नहीं कहूँगी तब-तक कोई कुछ नहीं खायेगा सुधा बहु पानी में तुलसी के पत्ते डाल दो ,आप ये hindi kahaniya nationalhindi पर पढ़ रहे है 

घर में सबको चेतावनी देकर उर्मिला देवी वहाँ से चली जाती है थोड़ी देर बाद नविन रसोई में जाता है और उर्मिला देवी उसे देख लेती है और बोलती है हे भगवान ये नास्तिक मेरे घर में कहा से पैदा हो गया। नविन बोलता है ,माँ ग्रहण तो सूर्य को लगने वाला है भला इसका मेरे भूख से क्या लेना-देना है तुम भी न माँ तभी वहा सुधा आ जाती है। 

और बोलती है, जाने दीजिए माँ जी नविन तो अभी बच्चा है भूख बर्दास्त नहीं कर पाया होगा ,उर्मिला बोलती है , तू इसकी तरफदारी मत कर बहु ये तो बचपन से ही चटोरा है और वैसे भी बहु इस प्रकार घर गृहस्ती नहीं चलती ये कभी नहीं सुधरेगा चल भाग यहाँ से नविन से कहती है। नविन बोलता है ,ओके माँ बाय-बाय भाभी  बोल कर नविन वहा से चला जाता है।आप ये hindi kahaniya nationalhindi पर पढ़ रहे है  

छुट्टी वाले एक दिन सभी लोग टीवी देख रहे होते है, नीलेश बोलता है अरे वाह आज तो दबंग3 आने वाली है इतने में उर्मिला देवी आ जाती है और बोलती हूँ सलमान खान भी कोई हीरो है अरे बहु आज जय संतोसी माँ फिल्म आने वाली थी न 8 तो बज गए। ला नीलेश रिमोट दे , नीलेश बोलता है, अरे माँ आज-कल धार्मिक फिल्मे  देखता है धर्मिक फिल्मो का ज़माना गया माँ,

उर्मिला देवी बोलती है ,तुम सब लोग आज कल की फूहड़ फिल्मे देख कर बिगड़ रहे हो और अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हो,इतने में नविन बोलता है चलो भइया अब दबंग 3 तो भूल ही जाओ माँ का आस्था चैनल सुरु हो गया है, उर्मिला देवी बोलती है तुम लोग नहीं सुधरने वाले जाओ ,
आप ये hindi kahaniya nationalhindi पर पढ़ रहे है 

इस तरह दोनों भाई चिढ़कर अपने कमरे में चले जाते है,कुछ दिनों के बाद उर्मिला नीरेश से बोलती है नीरेश बेटा तू नाहा कर फटा-फट त्यार हो जा बनारस वाले पंडित ज़ि आते ही होंगे ,तभी वहाँ पंडित ज़ि आ जाते है ,
उर्मिला बोलती है।, लो पंडित जी तो आगये आइये-आइये पंडित जी बैठिये ,पंडित ज़ि बोलते है तुम तो जानती हो उर्मिला बहन हम किसी के घर जल्दी नहीं जाते हमारे दर्शन पाने के लिए लोग दूर-दूर से आते है। 

उर्मिला देवी बोलती है आप तो अंतर यामी है पंडित जी आप से कुछ भी छुपा नहीं है बड़े परेशानी से दिन कट रहे है , पंडित जी बोलते है इसी लिए तो हम आये है आज से ठीक 10 दिन बाद हिमालय के भोलेनाथ के मंदिर में बहुत बड़ी पूजा होने वाली है पुरे परिवार के साथ वहां जाकर तुम्हे इन सभी चीजों का दान करना पड़ेगा,फिर पंडित जी उर्मिला देवी को सामान की लम्बी चौरी लिस्ट देते है। आप ये hindi kahaniya nationalhindi पर पढ़ रहे है 

उर्मिला देवी बोलती है , पंडित जी  तो बहुत सारा सामान है और फिर सब लोग इतनी दूर हिमालय कैसे जायेंगे , पंडित जी बोलते  कोई बात नहीं उर्मिला बहन मैं  वहां जाकर तुम्हारे नाम से पूजा कर दूंगा और सभी चीजों का दान भी कर दूंगा सब मिलकर एक लाख रूपये का खर्चा आएगा वैसे भी मैं साल में दो चार बार हिमालय आता-जाता रहता हूँ। 


उर्मिला हकलाते हुए बोलती है एक..... लाख........ नीलेश बीटा तूने सुना न जा जाकर पैसे ले आ, नीलेश बोलता है , कैसी बात कर रही हो माँ एक लाख रूपये कोई मामूली रक़म नहीं होती मैं एक-एक रूपये बचा कर इस घर का लोन चूका रहा हूँ। मैं इन सब बातो पर विश्वास नहीं करता मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है चलता हूँ। 

नीलेश कुछ बर्बरते हुए वहाँ से चला जाता है, उर्मिला देवी बोलती पंडित जी आप तो आज-कल के बच्चो को जानते ही है खैर आप बैठये मैं अभी पैसे लेकर आती हूँ। उर्मिला देवी पंडित जी को पैसे दे देती है और पंडित जि वहाँ से चले जाते है ठीक एक हफ्ते के बाद नीलेश के उसके ऑफिस से एक आदमी आता है। 

नीलेश बोलता है , और रोहित इतना सवेरे कैसे आना हुआ, रोहित बोलता है कुमार साहब जो ऑफिस के पैसे तुम्हे दिये थे मैं वही लेने आया हूँ। नीलेश बोलता है अच्छा तुम रुको मैं पैसे लेकर आता हूँ। नीलेश देखता है उसके लाकर में पैसे नहीं है नीलेश उर्मिला देवी से पूछता है।  माँ मेरे लाकर में से पैसे कहा गए। 

उर्मिला देवी बोलती है वो मैंने उस दिन पंडित जी को दे दिए थे, नीलेश बोलता है माँ तूने ये क्या किया वो मेरे बॉस के पैसे थे। और नीलेश अपना माथा पीटते हुए वही बैठ जाता है। 

Moral of the story:जरुरत से ज़्याद आस्तिक होना और एक तरफ़ा सोच हमेसा मुसीबत को जन्म देती है।  

Comments

Popular posts from this blog

3 भाइयो की hindi kahani

एक व्यक्ति के 3 बेटे थे ,तीनो में बहुत अंतर था ,3 नो अलग-अलग स्वभाव के थे बड़ा बेटा  बहोत मुर्ख और बतमीज़ था ,मझला थोड़ा समझदार था ,और सबसे छोटा बेटा  अति बुद्धिमान और संस्कारी था ,वो हमेसा अपने से बरो का आदर सत्कार करता है ,उस व्यक्ति को अपने सबसे बड़े बेटे की बहोत चिंता रहती थी ,किसी काम की वजह से उन्हें दूसरे गांव जाना था ,और वो गांव काफी दूर था ,इसी लिया उन्होंने अपने साथ खाना और कपड़ा ले लिया और यात्रा के लिए निकल परे, यात्रा के कुल 3 दिन होगये थे लेकिन वो अपनी मंजिल तक  नहीं पहुँच पाए थे ,वो लोग रास्ता भटक गए और खो गए उन्हें रास्ता याद नहीं आ रहा था ,उनके खाने का सामान खत्म हो गया था वो 2 दिनों से भूखे थे ,वो सभी एक पेड़ के निचे बैठ गये ,थोड़ी देर बाद उन्होंने एक घोड़े की आवाज़ सुनी  और देखा की वो एक व्यापारी था ये भी पढ़े  और उसके पास  बहोत साड़ा खाने का सामान एक गांव से दूसरे गांव वो बेचने जा रहा है था उस व्यक्ति ने अपने सबसे बड़े बेटे से बोला  की जाओ और उस व्यापारी से कुछ खाने को मांगो बड़ा बेटा  वहा जाता  और व्यापारी से बोलता है , बड़ा बेटा : अरे ओ व्यापारी तू इतना माल ले जा

लूडो वाली बहुँ की हिंदी कहानियां

लूडो वाली बहुँ  Hindi kahaniya  लूडो वाली बहुँ : विदाई के वक़्त मंजू की मम्मी मंजू से कहती है देख रे मंजू दूसरे शहर के लोग है इन्हे तेरी मोबाइल के एडिक्शन नहीं पता और रिस्ता हो गया वहाँ कोई नाटक मत करना नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मंजू अपने ससुराल पहुंच जाती हैं।  जहाँ उसे उसकी सास कहती है ,अब सास को आराम देकर  तुहि मेरे बेटे और इस घर का ख्याल  रखेगी अभी तो कोई काम है नहीं इसी लिए कल से सारि ज़िमेदारी सम्भाल लेना बेटा ,मंजू अपने कमरे में आराम करती है और अगली सुबह ससुराल में सारा काम संभाल लेती है  लेकिन काम करते हुए गुस्से में बर-बाराती भी रहती है (सारा घर सम्भाल लेना बहु लेकर आई है या नौकरानी एक तो घर न जाने कौन से कोने में है जहाँ इंटरनेट का एक सिग्नल तक नहीं आता और बात तो ऐसे करती है जैसे न जने कौन से ख़जाने की मालकिन हो )  सास: पहले ही दिन क्या हो गया बहु जो घर में कैलिसि फैला रही हो  बहुँ: अभी तक कुछ किया नहीं मम्मी जी बस अपनी किस्मत पर रो रही हूँ। मायके में पूरा समय wifi से लूडो खेलती थी यहाँ तो नोटिफिकेशन देखने लायक़ इंटरनेट नहीं चलता। लूडो क्या  घंटा

4 story in hindi language with morals

ईमानदारी का इनाम  1.  एक गाँव में एक पेंटर रहता था ,वो बहोत ईमानदार था और कभी किसी से बेमानी नहीं करता था। वो दिन रात मेहनत करता था ,फिर भी उसे 2 वक़्त की रोटी ही मिल पाती थी ,वो हमेसा सोचता की कभी उसे कोई बड़ा काम मिले और वो अच्छे से पैसे कमा सके , एक दिन उसके पेंट की अदाकारी के बारे में जमींदार साहब को पता चला जमींदार साहब ने उसे बुलाया और कहाँ तुम्हें मेरी नाव पेंट करनी है , पेंटर: जी ठीक है हो जाएगा  ज़मीनदार: अच्छा ये तो बताओ कितना लोगो , पेंटर: साहब ऐसे तो नाव पेंट के 1500 होते है। आपको जो मन हो वो देदे, ज़मीनदार: ठीक है चलो नाव देख लो  पेंटर: चलिए  पेंटर नाव देख लेता है ,और बोलता है जमींदार साहब मैं अभी पेंट लेके आता हूँ , पेंटर पेंट लेके आता है ,और पेंट करना सुरु कर देता है। जब वो पेंट करते-करते नाव के बिच में आता है तो देखता है ,की उसमे एक सुराख़  है ,वो उस को भर देता है और पेंट पूरा होने के बाद जमींदार को बुला कर ले आता है ,जमींदार उसके काम से बहोत खुश होता है , और बोलता है कल अपने 1500 ले लेना ,वो उस सुराख़ के विषय में जमींदार को नहीं बताता है और वो वहाँ से चला